728x90 AdSpace

  • ताजा ताजा

    हजार कुकर सँ निक एकटा शेर जनता आब बुझ लागल यो फेर ।

    हजार कुकर सँ निक एकटा शेर
    जनता आब बुझ लागल यो फेर ।

    विश्व नेपाल प्रति सदा पो उदार छ
    निमुखाको आडमा सधैं व्यापार छ ।

    जब से हम गईन्हि परदेश रे मितवा
    छुट गैल्ह गाव घर स्वदेश हो ।

    होली नाखेखलि दीवाली नमनौल्हि
    याद आबे मैयाँ के सनेस हो ।।

    यह देश नेपाल है यारों
    व्यबस्था वही पुराना है ।

    जनमुखि सरकार नही
    बस चला रहा जनाना है ।।

    _ऋषिशेष
    • तपाईको प्रतिक्रिया
    Item Reviewed: हजार कुकर सँ निक एकटा शेर जनता आब बुझ लागल यो फेर । Rating: 5 Reviewed By: Amrendra yadav
    Scroll to Top