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    मिथिला नगरी


    मिथिला नगरी देश हमर अछि
    सुन्दर आ विशाल यौ ।
    अप्पन भाषा भेष हमर अछि
    दुनियामे कमाल यौ ।।
    जनकपुर सन पावन धरती
    आओर कोनो ने धाम यौ ।
    एहन रिति–प्रीति कतऽ
    पावए दोसर ठाम यौ ।।
    मठ–मंदिरक छवि कि कहु
    देखति आँखि रसाएत यौ ।
    भक्त जनक अछि मेला लागल
    देखू साँझ परात यौ ।।
    भक्ति भाव सँ मन भरल अछि
    बच्चा आओर जुवान यौ ।
    राम सीताक सुमिरन कए
    निकलैत अछि सब काम यौ ।।
    धन्य अछि मैथिल, धन्य अछि
    मिथिला जनकपुर नगर यौ ।
    सीताक पवित्रता सँ सिँचल अछि
    सागर यौ ।।
    धनुषक्षेत्र आ गंगासागरक
    शुद्ध जल कमाल यौ ।
    अन्न बस्त्र सँ भरल नगरी
    दुःखक कोन सवाल यौ ।।
    महछि मैथिल, मिथिला अप्पन
    देश अछि कमाल यौ ।
    नै जायब हम काशी तिर्थ
    अपने नगर विशाल यौ ।।
    किरण झा९रश्मी०
    मुरलीचौक वार्ड नं। ४
    जनकपुरधाम
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    Item Reviewed: मिथिला नगरी Rating: 5 Reviewed By: Amrendra yadav
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