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    वीर मधेशी (क्रान्तिकारी कविता )



    कहब अपना के वीर मधेशी
    पिठ देखा क भागब पाछु बेसि
    डैट नै सकब जँ दुशमन के आगु
    धिक्कार अँहा पर मिथिला बासी
    लुटा रहल माँ मिथिला के इज्जत
    सुइन नै रहल छै केउ चित्तकार
    जागु मैथिल अखने जागु अँहा
    बिन आन्दोलन भेटत नै अधिकार
    एक डेग हम बढेलौं दोसर डेग अँहु बढाउ
    अपन पुर्खक सब के लाज बचाउ
    बैन क रहु सब अपना मे एकताबध्य
    सफलता के शिर पर ताज चढाउ
    मांगब कि हक अपन नेपाली फिरङी स
    फेकैय इट त जबाब पत्थर स दिय
    सहब नै आब कैनको सोशन दमन
    माँ मिथिलाक अँहा सपथ ल लिय
    अटल रहु आ अत्याचारी उपर टुइट पडु
    हक अधिकार ला सब एक जुइट पडु
    मान शान बचाउ अपन भाषा भेष के
    तखने कहाइब अँहा वीर मधेशी
    जय मधेश जय स्वराज

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    Item Reviewed: वीर मधेशी (क्रान्तिकारी कविता ) Rating: 5 Reviewed By: Amrendra yadav
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