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    ऋषिशेष उवाच :

    पृथिव्यां पुत्रास्ते जननि बहवः सन्ति सरलाः
    परं तेषां मध्ये विरलतरलोहं तब सुतः ।
    मदीयोयं त्यागः समुचितमिदं नो तवशिवे
    कुपत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति ।। श्लोक अर्थः
    माँ ! इ स पृथ्वीपर तुम्हारे सीधे-साधे पुत्र तो बहुत से है, किन्तु उन सबमे मैं ही अत्यन्त चपल तुम्हारा बालक हुँ; मेरे जैसा चञ्चल कोई विरला ही होगा ।
    शिवे ! मेरा जो त्याग हुआ है, यह तुम्हारे लिये कदापि उचित नहीं है; क्योंकि संसारमे कुपुत्रका होना सम्भव है, किंतु कहीं भी कुमाता नहीं होती
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    Item Reviewed: ऋषिशेष उवाच : Rating: 5 Reviewed By: Amrendra yadav
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