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    गजल


    साउन माँस सखी सुरु भेल जे
    मन मे उठल उमंग हिलोर !
    जे प्रीयतम आइ संगे रैहतैथ
    आशो पूरा कैरतैथ मोर !
    मधुर मिलन के एहि बेला मे
    हलैस क पिया लगैबतैथ कोर !
    जनम जनम के प्यासल मन
    नेह बैरसैबतैथ पोरे पोर !
    रंग विलाश के मन उपवन मे
    उमंगक चैलतै अपन जोर !
    प्रेमक बर्षा छुइट क बैरसैत
    मोन मोरा होइत प्रेम बिभोर !
    जे प्रीतम आइ संगे रैहतैथ
    आशो पूरा कैरतैथ मोर !!

    सम्पुर्ण मिथिला बसि मे मधुश्रवनी के शुभ कामना
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    Item Reviewed: गजल Rating: 5 Reviewed By: Amrendra yadav
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