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    जनकपुरिया

    ऋषिशेष
    रे बौराहा कियाक भटकै छे दरदर
    बनिक तों आईकाल्ह भक पागल ।
    तामस उठल तें हमरो कहा गेल
    तों सब जन्म जे लेने छे अभागल ।।

    धाम ने रहतौ त पहिचान खतम
    जानकी माता के आर ने लूट ।
    जा क सिख रामअशिष सन सँ
    गंगा आरती जनक नाता अटुट ।।

    जकरा कृपा सँ जोरैछे हाथ मुह
    तकरे लोप करवाक मे लागल छे ।
    त्याँ हम बनि भटकै छी पागल
    तों सब बनल मुढ अभागल छे ।।

    ...क्रमशः

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    Item Reviewed: जनकपुरिया Rating: 5 Reviewed By: Shesh Narayan Jha
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